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Tuesday, 19 March 2013

Rahu in Lal Kitab

राहु लाल किताब 


राहु मंदा तो दक्षिण मकान हद से जयादा मंदा होगा। धन की भारी हानि और यहाँ तक की हाथी चींटी से मर जाए।  गर चन्द्र या खाना नं ४ अच्छा तो राहु मंदा न होगा। चन्द्र का उपाय जरूरी होगा।

मंगल १२ या ३ या सूर्य + बुध नं ३ तो राहु मंदा न होगा। गोया सूर्य + बुध नं ३ क्यों? :)

राहु नं ४ अकेला मंदा नहीं होता।

दुनिया के फर्जी डर का सोच विचार, जागते दिमाग के कयासी ख्याल की नकली लहर , खराबी का 
४२ साल का समय राहु का होगा।       

सब कुछ होते हुए भी कुछ न होना राहु शरीफ की वास्तविकता है। दिमागी लहर का स्वामी, सब शत्रुओ से बचाव और उसका नाश करने वाला है। 
 

आम हालत १ २ घर 

हाथी तख़्त पर ग्रहण रवि का , दसवे शक्की खुद होता है।
लेख पगूडा गुरु मंदिर का, रोता गुरु घर १ १ हो।
आयु धन का राखा तीजे, गोली पक्का बंदूकची हो। 
पाप कसम वो करता चौथे, संतान बची न पांच की हो।
धुआँ बुध शुक्र सातवे उड़ता, कटती फाँसी घर ६ से हो।
मौत नकारा घर ८ वे बनता, जहरी चन्द्र जब सांप से हो। 
जले धर्म ९ राहु भट्टी, पर शफा पागल को देता हो। 
लाख उमींदे १२ फर्जी, हाथी खर्च न रुकता हो। 

सफ़ेद रंग का मानिंद हाथी फूंक मार कर नीला हो चुके शरीर को ठीक कर सकता है. :)

आसमान का गुम्बद और समुंद्र दोनों ही नीले है। जब दोनों और का नीलापन मदद पर हो तो संसार उसके सामने झुक जाता है। मंगल के साथ या दृष्टि होने पर तो गोया केतु का असर होगा। 

जब टेवे में मंगल नेक + शनि तो क्या कहना; माशाल्लाह! गर सूर्य + बुध खाना नं ३, राहु नं ४, या  उत्तम तो ऐसी किस्मत का मालिक की पूछो मत। मंगल १ २  हो तो भी राहु नेक होता है। 

मंगल बद जो लिखावे और शनि जो लिखे उसे स्वप्न में जान लेने की शक्ति राहु में है यानी वो पहले ही जान लेगा।       
गर राहु शनि के बाद के घरो में तो शनि का हुक्म चलता है पर शनि से पहले तो खुद हाकिम होगा और यहाँ तक की शनि को हुक्म देगा।

चन्द्र के साथ मानो बंधा हुआ हाथी। 

सूर्य के साथ तो ग्रहण तो है पर स्वयं हिलने वाला हाथी यानी मंदा फल अपना भी। गुरु के शेर - साधू  को दमा कोढ़ देगा,    मगर बुध के पक्षी और शनि के कौवे को न सिर्फ उड़ने की शक्ति देगा बल्कि उच्च कर देगा। एक और राहु शुक्र का जानी शत्रु और केतु को रास्ता दिखाने वाला सरदार तो दूसरी और साँप की मणि और    मँगल के महावत के साथ शेरो का शिकारी हाथी। 


राहु का मंदा असर ४ २ वर्ष बाद जा कर ख़त्म होगा और फ़ालतू धन, सांसारिक आराम, बरकत होगी।    

कड़कती बिजली, भूचाल, आग का लावा, पाप की एजेंसी में बड़ी का स्वामी, हर मंदे काम में मौत का बहाना घड़ने वाली शक्ति, ठगी, चोरी, अय्यारी का सरगना, आनन फानन में चोट मार के नीले रंग कर देने वाली छुपी लहर का नामी फ़रिश्ता कभी छुपा नहीं रहता।


सूर्य + शुक्र मुश्तरका अमूमन राहु नेक नहीं होता और जब शनि + सूर्य हो और मंदे भी हो गोया राहु नीच और मंगल बद। बेडा गर्क। 

केतु पहले और राहु बाद में अच्छा नहीं मानते है। राहु यहाँ मंदा और केतु सिफर होगा।

राहु शत्रु ग्रह को साथ लेकर केतु को देखे तो केतु का फल मंदा। पूरा मंदा सब और से। सब कारक। 

सूर्य देखे राहु या सूर्य साथी राहु तो साथ वाले घर का हाल भी मंदा होगा। 

मंदे राहु के समय क्या करे? 

जब चन्द्र खराब हो यानी मन अशांत हो तो चन्द्र का उपाय करे. चाँदी हमेशा डाल कर रखे
दाल मसूर भंगी को प्रातः दे। या पैसा खैरात। 
मरीज के वजन के बराबर जौ (अनाज कनक जौ) चलते पानी में बहा दे। 
जौ रात्रि सिरहाने रख कर प्रातः जानवरों - गरीब को बाँट दे। 
राजदरबार या व्यापार के झगडे, और शनि के समय, कच्चा कोयला वजन बराबर दरिया में बहा दे। 
    
राहु लाल किताब
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Sunday, 17 February 2013

Rahu in second House Lal Kitab

राहू खाना नंबर 2 लाल किताब 


Original phrases of Lal Kitab 
   
उम्र गुजरी मंदिर जो मुफ्त माल खाते, मिले दिल कहाँ फिर जो खैरात बाटें।

लेख पंगूड़ा 2-8 घूमे, मिटटी सोना दो मिलता हो। 

भूचाल माया जर चन्द्र रोके, राजा सुखी वो होता हो। 

उम्र लम्बी गुजरान हो उम्दा, जगतवासी चाहे राजा हो।

बचत शुन्य या हो गुना 11, लिखा झलक दो रंगा हो। 

लेख धुँआ जब शनि हो मंदा, मदद* चन्द्र गुरु करता हो। *चांदी की ठोस गोली या गुरु की पीली चीजे 

शनि केतु बुध फ़ौरन उम्दा, मंगल शुक्र घर भरता हो। 

धर्म मंदिर का पापी दुनियां, कब्र बैठा खुद तरसता हो। 

जुल्म जमाना बेशक कितना, कैद राजा न होता हो।

गुरु हालत पर माया चलती, धुआं निशानी होता हो।

वर्षा मगर जर उस दिन होगी, शनि तख़्त गुरु उम्दा हो। 
                                                                                                      

बृहस्पति के बुर्ज पर राहू के जाल का निशान।   →

भावार्थ  

अब राहु की चाल खाना नंबर 2 में मध्यम दर्जे की न होगी। आखिरी दर्जा होगा (नेक या बुरी) होगी।  

गृहस्थ दर्जा बेहद लम्बा मगर धन - दौलत की अच्छी या बुरी हालात् का फैसला  बृहस्पति पर होगा। जिसकी निशानी राहु स्वयं ही अपनी चीजे काम या सम्बन्धी राहु से सम्बंधित दृष्टि गोचर होगा। मगर धन की बरसात उस दिन होगी जब शनि नंबर एक में और गुरु भी उत्तम हो। 

यदि शनिचर के अपने जाती उसूल पर या शनि नं 1 के हिसाब से उत्तम हो तो राहु का धुंआ उत्तम बरसाती बादल या आगे आने वाले अच्छे समय की निशानी होगी और शनि नं 1 या गुरु के उत्तम होते ही धन की वर्षा होगी।  
 

शनि जाति स्वभाव से मंदा हो तो राहू के जहर का मंदा कडवा धुआं होगा और उस धुआं से दम भी घुटता होगा।
   


खाना नंबर 2 वास्तव में राहू के लिये उसकी असल बैठक या गुरु का पक्का घर है 

जिसमे राहू राजा सामान है मगर वो इस घर में चलता गुरु की आज्ञा से ही है. 

पापी मंदिर में भी नहीं छुपते. जिस घर की कभी चोरी न हुई हो या वह घर जिससे  
चोर 

कोसों दूर भागे रहे वेह भी राहू की चोरी और दिन दहाडे सीना जोरी से बरी न होगा.  


राहु खाना नं 2 याने मंदिर में बैठा हो और उसे चुराने के लिय वहां कुछ भी न मिले तो राहु पुजारी की आँखों के सामने से और उनके पूजा करते करते ही मंदिर की मुतियाँ बाँध कर भाग जायगा। इस का अर्थ क्या हुआ? अर्थ यह है की राहु चोरो का स्वामी है। और चोरी की वाक्यात, माल या नकदी, आम होमय और वह भी जातक के सामने और वो भी दिन दहाडे। राहु का धर्म इतना ही होगा की रात को कोई नुक्सान न होगा। लेकिन दिन के समय राहु की शरारत और चोरी सरे आम होगी। अपनी जेब में संभाल कर रखी हुई धन दौलत गुम या चोरी होगी। टेवे वाले के चोर होने की शर्त नहीं है। उसके अपने पीछे चोर होगे। अब राहु की शरारत से बचने के लिए चांदी की ठोस सहायक होगी। ससुराल के मंदा हाल का बचाव होगा। 

ऐसा व्यक्ति राजा या अधिकारी होगा। चाहे जंगल का ही क्यों न हो। चाहे धर्म मंदिर साधू भी क्यों न हो पर ऐसा टेवे वाला हाथिऒ को खाना देने की शक्ति रखता है।  

भाग्य का लेख दो रंग होगा। भाग्य का लेख पघुडा होगा। मिटटी का सोना सोना हो और सोना मिटटी होगा। पर उत्तम जीवन होगा।
नेक हालत में शुक्र का 25 साला उम्र आयु धन के आराम का होगा।

कंगाल हो या घर छोड़ कर भागे। राज छोडे चाहे दरबार छूटे कुछ भी हो पर राजा की कैद में न होगा। मगर खैरात के जमा माल से चोरी का दाग न धो सकेगा। यानी जिस जगह लोग अपनी मुसीबत की हालत के लिये धन दौलत खैरात में दे रहे होंगे वहां उससे चोरी हो जाया करती है।

गुरु शुक्र चन्द्र जमा शनि केतु एक के बाद दूसरा चाहे मंदा होता जावे, तो भी ऐसे टेवे वाले को राहु की सबसे ऊपर सहायता होगी।

मंदी हालत 

राहु के समय 42-21-10 पर अगर जद्द्दी मकान के उ-प कोने पर पूर्व की तरफ मुहँ करके रोटी पकाने धुआं निकालने की जगह हो तो टेवे वाले के ससुराल और उसके अपने घर खानदान का धुंआ निकाल देगा। 21 से 42 साला समय मंदी हालत प्रभाव देता जायगा। भाग्य का हाल ऊपर से नीचे घूमते पूंघडे की तरह होगा। मंदे वाकया, गबन चोरी धन हानि बहुत होगी। कैदखाना, बेइतबारी होगी। चन्द्र और गुरु का उपाय करे। अपने पास रखे या शारीर पर। या उ-प कोने में।  

मुफतखोर पर भिक्षा कभी न देगा। अपना आखिर समय (कब्र) खराब कर लेगा। 25 साल तक उत्तम पर 26 साल से राहु 2 और केतु 8 का मंदा समय शुरू होगा। 

माता से नेक सम्बन्ध उत्तम।