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Sunday, 17 March 2013

Sun Surya in Lal Kitab

सूर्य लाल किताब 

 १२ घरो में सूर्य की उत्तम हालत का प्रभाव औरअन्य ग्रहो से सम्बन्ध 

उत्तम सूर्य वाला कुल संसार को चमकाए, धन देता हो, लम्बी (१०० वर्ष) आयु पावे, अन्दर बाहर सब अच्छा हो। मंदे समय बुरा प्रभाव रात के स्वप्न की भाँती छुपे ढंग से रहे। किसी का सवाली न हो। बल्कि स्वयं खैरात पूरी कर दे। भीख चाहे न दे  मगर किसी की झोली से कुछ भी न ले। स्वयं चोटे खाकर बढ़ेगा मगर दुसरो को चोट न मारेगा। चाहे मृत्यु को कोई अच्छा नहीं गिनता फिर भी सूर्य उत्तम वाले की मृत्यु अच्छी ही होगी। २२ साल की उम्र में राजदरबार से धन कमाने लगेगा। सूर्य की गर्मी, धूप और उसका नाप तौल राहु केतु से पता चलेगा। उत्तम सूर्य के समय चन्द्र शुक्र और बुध का फल भला ही होगा। केतु  नं १ या मंगल नं ६ हो तो सूर्य उत्तम चाहे कही भी कैसा ही बैठा हो।     

 सूर्य देखे चन्द्र को पर सूर्य नं १ में न हो तो चन्द्र का फल चन्द्र के आधे समय तक सूर्य के प्रभाव में दबा होगा। इसके बाद वह अपना जुदा असर सूर्य की तरह उत्तम फल देगा।सुखी कुएँ भी पानी देने लग जाएगे। (जन्म कुंडली २४ - १२ - ६ साल आयु में हो और वर्षफल १२ - ६ - ३ मास हो। 

चन्द्र देखे सूर्य को : अब चन्द्र सूर्य को कोई सहायता न देगा अपना प्रभाव चाहे कभी मंदा कर ले। 

बुध ६ और सूर्य कायम: अपनी कलम से राजधानी का धन बढे।इमानदारी का धन साथ दे। 

सूर्य देखे बुध को १०० % : सूर्य को सहायता होगी। 
सूर्य देखे बुध को ५० % ससुराल अमीर, स्त्री का भाग्य शीशे की तरह चमके। 
सूर्य देखे बुध को २५ % तो योगाभ्यास, गणित, ज्योतिष आदि उत्तम हो। 

बुध देखे सूर्य को दर्जा दृष्टि कुछ भी हो बुध का प्रभाव उत्तम। स्वास्थ्य, बुद्धि, स्त्री सभी पर प्रभाव उत्तम।                  
शनि देखे सूर्य को २५ % तो सूर्य का प्रभाव बर्बाद मगर शुक्र आबाद। उत्तम फल का गणित, संपादक होगा। 
शनि देखे सूर्य को ५० % तो शनि की चीजे सहायक होगी जैसे मकानों की विद्या। 
शनि देखे सूर्य को १०० % तो जादूगरी का स्वामी। 

सूर्य देखे शनि को तो शुक्र बर्बाद, स्त्री पर स्त्री मरे। पर शारीरिक शक्ति कम न होगी।   

शनि हो पहले घरो में और सूर्य बाद के घरो में: सूर्य का प्रभाव मंदा। और शनि उसके (सूर्य) प्रभाव में अपना मंदा प्रभाव अवश्य मिलता होगा। यानी सूर्य की रौशनी तबाही से भरी होगी। शारीरिक कमजोरी होगी। मगर चन्द्र (सर्दी), मंगल (लाली), बृहस्पत (हवा), बुध आकाश जो सूर्य में आवश्यक अंग हो उन पर कोई बुरा प्रभाव न होगा यानी सूर्य की दी हुई भाग्य और कमाई पर मंदा प्रभाव न होगा। ऐसी हालात में रहने के मकान में दक्षिण (पूर्व की और मुहँ करके दाईं तरफ) पानी का कोरा बर्तन दबाए और उसका पानी ४० - ४ ३ दिन तक सूखने दे।   

सूर्य की जड़ में पापी और उसी समय शुक्र (नं २ - ७) में चन्द्र, राहु तो माता - पिता के आयु शक्की। जिस घर में शुक्र बैठा हो उसी घर की शुक्र से सम्बंधित चीजो की हालत मंदी। सूर्य बैठा होने वाले घर पर शुक्र का कोई बुरा प्रभाव न हो। 

सूर्य को जब मित्र ग्रह की सहायता हो या टेवे वाला नमक कम या बिलकुल न खावे तो वह नेकी और सांसारिक कामो में पिता से आगे बढ़ जाएगा। 
जन्म कुंडली में सूर्य १-५-११ में हो तो टेवा बालिग़ होगा यानी बच्चे  के गर्भ में आने से ही प्रभाव देने लग जाएगा। ऐसी हालत में (जब सूर्य १-५-१ १ ) जन्म कुंडली या वर्षफल  बैठा हो : 

नं १ का सूर्य साथी ग्रहो को मदद देगा चाहे शत्रु। 
नं ५ - ११ का सूर्य होने पर दुसरे ग्रह स्वयं सूर्य को मदद करेगे चाहे सूर्य के शत्रु ही क्यों न हो। टेवे में ग्रहण (सूर्य + राहु),  (चन्द्र + केतु) के समय सूर्य ४५ साल आयु तक कोई भला फल न देगा। बल्कि मंदा फल ही देगा, माना गया है।           

सूर्य स्वयं अकेला नीच मंदे घरो में हो तो वह स्वयं कभी नीच न होगा मगर सूर्य की जगह केतु नर संतान का भाग्य आयु पिता को संतान का सुख बर्बाद मंदा होगा। बेहद गुस्सा बर्बादी का कारण होगा और इसका उपाय दान कल्याण माना गया है। 

सूर्य जब कभी नं १ में आए, जन्म कुंडली में चाहे कही भी हो , शुक्र का प्रभाव नीच होगा। मगर सूर्य स्वयं के लिए उत्तम होगा। ऐसी हालात में बुध की पालना सहायक होगी।  

२-६-७-८-१०-११-१२ में अकेला बैठा इन घरो से सम्बंधित चीजो पर अपना अच्छा प्रभाव न देगा परन्तु यह अर्थ नहीं की बुरा देगा। शत्रु के साथ याने सूर्य - शुक्र, सूर्य - शनि, सूर्य - राहु, सूर्य - केतु किसी भी घर में हो, साथ बैठे है ग्रह की उस खाना नं से सम्बंधित वस्तुओ पर जिनमे की वह बैठा हो दुबारा उसी घर में आने पर (वर्षफल में) मंदा प्रभाव देगा। ऐसी हालत में २ २ से ४ ५ के मध्य शत्रु ग्रह अपनी जाती मियाद पर भी बुरा प्रभाव देगे। 

मसलन: सूर्य - शुक्र नं ५: जब कभी वर्षफल में नं ५ में आए ( २ २  से ४ ५ वर्ष के बीच - ३४ वर्ष में ) या शुक्र की मियाद याने २५ वर्ष में स्त्री की शारीरिक चमड़ी पर मंदा प्रभाव देगा। बुध की पालना करे। लेकिन   ग्रहो के साथ सूर्य के मित्र (बुध नहीं)  भी हो तो मंदा प्रभाव मित्र ग्रहो से सम्बंधित चीजो उस खाना नं की जहा बैठे हो, पर होगा और शत्रु बचा रहेगा। शत्रु ग्रह यदि एक दो तीन की गिनती से सूर्य से पहले घरो में और दृष्टि के असूल पर भी पहली तरफ बैठे हो तो सूर्य का मंदा प्रभाव टेवे वाले पर होगा। लेकिन यदि शत्रु बाद में हो तो कुंडली वाले की जगह मंदा प्रभाव शत्रु ग्रह और घर पर होगा। .                    

मंदे प्रभाव का उपाय: यदि सूर्य का अपना प्रभाव दुसरे ग्रहो पर बुरा हो तो सूर्य के मित्र चन्द्र मंगल बृहस्पति को नेक कर ले। जब कोई सूर्य से बर्बाद हो रहा हो तो स्वयं सूर्य का उपाय करय. जब सूर्य का अपना प्रभाव नष्ट हो रहा हो तो शत्रु ग्रह जो उसे बर्बाद कर रहा हो नेक कर लेना सहायक होगा। खाना नं ६-७ में बैठा होने के समय आम मंदी हालत में बुध का उपाय सहायक होगा और चन्द्र नष्ट करने से सहायता मिलेगी। याने रात को रोटी के बाद चूल्हे की बाकी बची आग पर दूध के छीटे मार कर उसे बुझाते रहना सहायक होगा। 

सूर्य के शत्रु ग्रहो के घर बैठा (मालिक और पक्का दोनों ले) , २-६-७-८-१०- ११- १२, अकेला सूर्य उन घरो के मालिक घरो से सम्बंधित  वस्तुओ पर नेक प्रभाव बंद करेगा : मसलन 

खाना  नं 2  में बैठा सूर्य स्त्री धन, बचत अपनी कमाई की, पति रहित या प्यार से फसाई स्त्री। 
सम्बंधियो से: माता, बुआ, फूफी, मासी, आलु, गाय स्थान, घी अभ्रक सफ़ेद काफूर, बगैर सींग गाय, शारीरिक अंग, गुदा ।        

केतु कमर ६ संतान व उसका सुख, माता पिता के तालुक  रिश्तेदार जो टेवे वाले कीपैदा पैदा होने से पहले कायम थे मामा, नाना, नानी आदि रफ़्तार चाल  साहुकारा, खरगोश चिड़ा, कमर शारीरिक भाग              

नं ७ : बाहरी स्त्री, शारीरिक त्वचा की सुन्दरता, शादी गृहस्थ फल चरी ज्वार, सफ़ेद गाय,   कांसी का बर्तन, हर दो प्यार चमड़ा शरीर 

नं ८ : स्त्री पुरुष  बिच्छु कनपटी 

नं १० :   जद्दी जायदाद, माता पिता का सुख, काला नमक, तेल,  लोहा लकड़ी दृष्टि   ३  रहने का मकान मगरमच्छ सांप का घर भैंस घुटना 

नं १ १  : जन्म समय आयु तक अपनी आय, ख़रीदा हुआ मकान, संतान की आयु व गिनती, पहला हाकिम शारीरिक शक्ति राहु केतु के कार्यो का निर्णय चूतड। 

नं १ २ : धन श्राप, हड्डी, पारिवारिक खून, सर, दिमागी काम-काज, स्त्री पुरुष की अपनी आयु का सम्बन्ध,   विचारो का मासरना  पैदा होना,  की प्रसिद्धि कोयले हाथी खोपड़ी सर की हड्डी        


                           सूर्य लाल किताब 
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Sun Surya in Lal Kitab

सूर्य लाल  किताब
 सूर्य दुनियावी राजा - जातक के जिस्म और का असर 

खाना नं १ 

पिता की पूरी सहायता, बेटे से आशा न करेगा। बाप से चाहे धन मिले न मिले पर संतान को अवश्य धन देकर जाएगा। राजा होगा जिसे सिवाय न्याय के और कोई सम्बन्ध (धर्म आदि से) न होगा।  हुकूमत गर्म की दुकानदारी नर्म की तबियत शुभ होगी। पर रहम से भरा होगा। 

खाना नं २ 

मंदिर की ज्योति जो किसी मजहब के अनुसार दबी नहीं है। धर्म देवता, माली हालत मध्यम, स्वभाव सतयुगी, छोटी जगह का राजा जो अपने भाग्य की शर्त नहीं करता मगर साथियो, बच्चो, सम्बंधियो को जरूर धनवान कर देता है। चाहे अपने आप निर्धन दरवेश ही क्यों न हो। सेवा साधन उन्नति की नीव होगा।           

 खाना नं ३ 

मृत्यु को रोकने तक की शक्ति वाला जिससे मृत्यु भी डरे। खुद हलवा पूरी खाए दुसरो को भी खिलाए। जो शुभ कार्य कर दिखलाएगा, झुटे को काट खाएगा। बुध जो इस घर का स्वामी है अपने जंगल को इतना घना कर देगा की सूर्य नं ३ की जमीन तक धूप ही न आने पाए। मगर सूर्य की अपनी गर्मी से जंगल को ही आग तक लगने को तैयार होगी। या तो जंगल में हरियाली हो या बुध हरे रंग की बजाय खाकी रंग हो जाए। मगर ऐसा  व्यक्ति यदि दुसरो को पालेगा तो स्वयं भी पलता जायगा नहीं तो जल कर मर जाएगा।    

खाना नं ४

 राजा के घर जन्म ले या न ले परन्तु स्वयं राजा अवश्य होगा। आप ने चाहे जन्म से पैसा न  परन्तु संतान को रेशम के कीडे की तरह पैसा खर्चने की शक्ति दे जायगा। माता जीवित हो न हो मगर बाप की तरफ से हो  है कि माताएँ अवश्य हों पर स्वयं चाल-चलन होगा। ऐसा व्यक्ति स्वयं चाहे हानि उठा ले दुसरे की हानि नहीं  करेगा। यदि पराई स्त्री को साथरखे  रखे तो संतान न पावे या निसंतान होगा। अगर दान देगा तो मोती देगा।     

खाना नं ५ 

मनुष्य की शराफत और दुनयावी मर्यादा से भरा राजा जो अपने परिवारिक खून को अपना मंदिर बना लेगा। जन्म से ही भाग्य का जलता दिया होगा। जो किसी के जलाने से न जलेगा यानी जन्म से भाग्य का स्वामी होगा। आयु के साथ साथ धन भी बढेगा। उसके खर्च किए धन से संतान के लिए धन अनाज के रास्ता खुल जायगे, मालामाल होगा। मनुष्यों में कोई बन्दर नहीं, बंधे हुए व्यक्तिओ, बंदरो को आजाद करवाने का हामी होगा।                  .             

खाना नं ६ 

आसमान तो गर्म, सूर्य की गर्मी से जमीन भी जलने लगी  जिसकी आँच रात को भी को भी ठंडी न हुई। बेवकूफ शाह तीस मारखां। खेत में कनक के बीज जलने लगे ऐसी हालत में वाही बचा जिसने अपने घर पानी की जगह धुध दिया, और बुरा करने वाले को भी आशीष दी। ऐसा आदमी जिद पर आया हुआ वैसा ही होगा जैसा कि एक देश से निकल हुआ राजा अपनी प्रजा को आग की लपटों में जलता हुआ देख कर रोने की बजाय हंस देगा। चाहे वेह स्वयं निसंतान या मंद बूढी न होगा। ऐसा व्यक्ति कभी मन और वाणी से गन्दा न होगा। चाहे उसे भाग्य का लाख मुकाबला करना पडे।    

खाना नं ७ : 

 ऐसे व्यक्ति के पैदा होने पर ऐसा लगेगा कि घर का सूर्य पैदा हुआ है। परन्तु चढते - चढते वह दुमदार तारा बन जाएगा। उसने सब कुछ समझ और नेक बुद्धि से किया मगर जब उसने स्वयं हौसला किया तो सारा जलने से आधा ही बचा लिया। अंत में जब जिम्मेदारी उसने ख़ुशी से संभाली तो सुख की रोटी मिलने लगी और साथ वाले भी आबाद हुए। राजदरबार का साथ मिला, खेती पकी मगर अनाज से जले की बू आने लगी यानि ऐसा राज होगा जिसकी ताज गुम हो गई हो अर्थार्थ सब खुच होते है भी कुछ न होगा। बेशक राजगद्दी पर जन्म लेकर भी गद्दी पर न बैठ पाए। हाकमी गर्मी की, दूकान नरमी का हामी होना ठीक रहेगा। अगर कोई जला देवे हम भी उसे जलना सिखाएगे मगर खुद न जलेगे।                

  
खाना नं ८ : ऐसा व्यक्ति जन्म से ही कहने लगेगा, मरने वाले पूछ कर मरे, जन्म लेने वालो पर कोई बंधन नहीं है। जो आए अपना खर्च साथ लाए और जाने वाला कोई चीज साथ लेकर न जाए। जन्म चाहे  का हो मगर गुरु  गद्दी / राजा गद्दी का स्वामी होगा। उसको कोई नहीं हटाएगा मगर अपने हाथो से हारा भाग्य वापिस न पाएगा। यानि भंडारे रहे तो भंडारे भरे परन्तु भिक्षु बने तो भिक्षा ना पाए। जब तक अपने खानदानी खून पर हमला न करेगा, बर्बाद न होगा। मर गए का अफ़सोस तो है मगर जीवित करने की भी हमारी जिम्मेदारी है का स्वभाव और शक्ति रखेगा।   

खाना नं ९ : 

हकीमो को बिना दवाई ठीक करने की हिम्मत देने वाला। शाह और स्वयं भी बड़ा हकीम, डॉक्टर। अपने  के अलावा  अपने साथ सभी को पालेगा। "पिछली को छोड़ और आगे को न घबरा- लकिन संसार का सूर्य  तेरे साथ  चल रहा है" की भांति कार्य करने वाला होगा। 


खाना नं १०

पैसा तो खरा है मगर बाजार में कोई उसका सौदा नहीं देगा। संसार उसके सच्चे होने पर उससे डरता है। असली बची आग को भूत-प्रेत की आग समझती दुनिया है। फ्हिर भी राज घमंडी गुस्से वाला दूसरों को माफ़ करना तो एक तरफ अपने माँ-बाप को भी फांसी का हुक्म लिख देगा। नाक पर मक्खी नहीं बैठने देगा। जब तक रहेगे, झुक कर नहीं रहेगे। जब झुकना पड़ा तो हम नहीं रहेगे अगर रहेगे तो सिर्फ उसी के साथ जो हम प्याला हम निवाला हो, की प्रवृत्त्ति वाला ।       

दिखाने को सच्चा मगर दिल से झूठा होने की बदमाशी अगर नहीं देखी तो वह कर दिखाएगा।

खाना नं ११

गो लालची मगर धर्म तपस्वी होगा यदि कोई धर्म बेचकर खाएगा तो हमारा क्या खाएगा, के विचार बुलंद स्वामी, जिस तरह नेकी बढे बढ़ता चले. लेकिन जब स्वयं रोटी (कनक सूर्य) के साथ मॉस (शनि) मिला कर खाए तो सूर्य शनि के झगडे में केतु (नर संतान) बर्बाद हो परन्तु परिवार में  ऐसा व्यक्ति आप चाहे किसी भी खून से हो "हम नेकी ही कर दिखाएगे" का पक्का देवता होगा। 

खाना नं १२ 

सुख की नींद सोने वाला बेफिकर राज ऐसा जिसके राज्य में बन्दर भी घर बनाना सीखे लेकिन जब धर्म हानि का आदी हो तो अंधी देवी नाक कटे पुजारी, दिन दहाडे चोरी की घटनाएँ। बेआराम जीवन जिसके ले साधू की सेवा, शुक्र की पालना सहायक होगी। सुबह की मीठी हवा का  जमाना न भी हो और अगर जले भी तो आकाश का सूर्य मंदा ज़माना न रहने देगा।       

उसके चारो ओर जितनी भी आफते (मौसम) हो मगर वह बर्बादी (पतझड़) न देखेगा और न ही निर्धन और संतान रहित होगा। 

 ------------------जारी 



 सूर्य लाल  किताब
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Friday, 15 March 2013

Sun Surya in Lal Kitab

सूर्य लाल किताब 

गर्म शौक तेरा है नीवं उन्नति, मगर बढ़ न जाए कि हर चीज जलती 

पाप(A)  मंगल बुध* फैसला करता, ग्रहण होता खुद पाप से हो।  *सू रौशनी गर्मी, बृ तेज, मं किरणे, बुध आकार, चन्द्र चमक   
उत्तम रवि हो जिस दम बैठा, भला चन्द्र बुध शुक्र हो।
तख़्त केतु ६ मँगल बैठा,  उच्च रवि खुद होता हो।
आग जली चाहे ६-७ होता, दान मोती का देता हो।
मदद मित्र पर बाप से बढता, नमक छोडे खुद फलता हो।
शत्रु साथी से केतु(B)  मरता, दान दिए सब बचता हो। 
पाँच, पहले घर ग्यारह बैठा, शत्रु मदद पर होता हो।
ग्रहण टेवे हो जिस दम आया, पाप समय तक मंदा हो।
रवि देखे जब चन्द्र   भाई तख़्त बैठा न जब कि हो।
आधी आयु जब चन्द्र की होगी, लेख भला सब होता हो। 
बुध नजर जब रवि पे करता, दर्जा दृष्टि कोई हो। 
असर भला तब दो का होगा, सेहत माया या दिमागी हो। 
रवि दृष्टि शनि पे करता, बुरा शुक्र का होता हो।
शनि रवि से पहले बैठा(C), नर ग्रह स्त्री उत्तम हो। 
शनि शुक्र जब सूर्य देखे, मौत भरे दुःख होती हो 
मकान बनावे रिश्तेदारो के माया ख़त्म हो जाती हो। 
   
(B) सूर्य स्वयं अकेला नीच या मंदे घरो का तो - बर्बाद करने वाला गुस्सा संतान का भाग्य व आयु, या बाप की मदद मंदी होगी। 

(C)  सूर्य मंदी हालत के समय सूर्य का उपाय काम देगा  
  
(A) नेक हालत का फैसला पाप की हालत पर होगा। 

आकाश में रौशनी, पृथ्वी की गर्मी, राजा भिक्षु से, सच्चाई और पालना और उन्नति की शक्ति को सूर्य का नाम दिया है। जिसका होना दिन और न होना रात माना है। मनुष्य के शरीर में रूह, अपने शरीर से दुसरो की सहायता की हिम्मत का नाम सूर्य है। सर्दी चन्द्र, रौशनी गर्मी सूर्य का अपनापन, लाली मंगल, और खाली जगह का घेर बुध का आकाश व आकार इसके जरूरी भाग है। और समय की हवा याने गुरु के ज्ञान, संसारी बुद्धि और भाग्य की नीवँ इसकी देन है जिसे हर साँस लेने वाले तक पहुँचाना गुरु का काम है। चलते रहना, अपना अंत न बताना और इधर उधर है बिना एक ही जगह रात दिन करते रहना इसी सूर्य देव का ही अजूबा है। 

 १२ घरो में सूर्य की हालत 

सतजुगी* राजा घर पहले का,  दाता सुखी  जब २ का हो। 
धन भंडारी स्वयं तीसरे , जोड़ मरे घर ४ का हो।
औलाद बैठेगी हर दम पांच के, फिकर धन नं ६ का हो।
परिवार कमी चाहे होगी सातवे, राजा तपस्वी ८ को हो। 
आयु लक्ष्मी ९ बढता परिवार, दसवे स्वस्थ्य धन उत्तम हो। 
धर्म पूरा घर ११ उसका, रात सुखी घर १२ हो। 
           
*बाप को पूरी मदद पर पुत्र से कोई उम्मीद  न करो के स्वाभाव का स्वामी। 
चाहे बाप से कुछ न मिले पर पुत्र को देकर मरेगा। 
    
 ____जारी 

       

                           सूर्य लाल किताब 

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Saturday, 16 February 2013

Sun Surya Lal Kitab

Sun in 8th House

सूरज सूर्य खाना नंबर 8


मग्घर महीने रवि है 8 वें,            बटी है गर्मी सर्दी से।
मारग घर अब मौत न होगा,        जिन्दे होवंगे मुर्दों से। 
बड़ा भाई और गाय सेवा,             लम्बी उम्र निशानी हो। 
कुत्ता घर ससुराल का होवे,           हर जा इस को हानि हो। 


ऐसे टेवे में शुक्र का पतंग (शुक्र नं 1 होता) है जो काग रेखा का फल देगा, इस लिये सफ़ेद गाय मंदी हालत देगी। उजडे मकानों को बसाने वाला और पानी भरे बादलो को बरसा लेने वाला होगा। पत्थर से आग, आग से पानी से मिटटी या सारा ब्रहमांड पैदा कर लेने वाला होगा। मारग स्थान के बिच्छु से मुर्दे को जिन्दा करवा लेगा और इस की जहर से जलाए हुए पत्थरो से संखिया और संखिया से हिजड़ो और नामर्दों को तपस्वी राजा और मर्दों में  गिनवा लेगा बशर्ते की संगे दुनिया ( 3 कुत्ते) या चोरी का दिलदादा न हो। 

राजा तपस्वी जिस घर बैठे,            मौत भागे कोसो दूर। 
मर्द नामर्दी ब्रहमांड जागे,               जिन्दा करेगा मुर्दों को। 
उम्र रवि से राज तरक्की,                भंडारी दौलत जर बनता हो। 
हालत पापी खुद किस्मत,               लेख साथी बुध होता हो। 
संगे दुनिया दिलदादा चोरी,              लग्न बहुरूपी मंदा हो। 
इश्क तबाही करता ऐसी,                 नाम रहे न लेवा को। 
शनि तीसरे, गुरु हो मंदा,                दरवाजा दक्षिण बद मंगल हो। 
पांच पहले घर शुक्र बैठा,                उम्र छोटी जले जंगल वो। 



स्वयं के भाग्य का हाल पापी ग्रहो की अच्छी - बुरी हालत पर फैसला देगा। तेरी सच्चाई की आग संसार की बदी की लहर को जला देगी। और तेरे छुपे शत्रुओं को भी जला देगी। तपस्वी राजा जिससे मौत भी कौसो दूर भागती हो। याने उसके होते हुए उसके खून के रिश्तेदार की मौत नहीं हो सकती। जब कोई होगी वो इधर-उधर बाहर गया होगा। दिमागी खाना नं 28 पापी ग्रहो से मुश्तरका (बहरुपियापन) नक़ल करने की आदत का मालिक होगा। सूर्य की आयु से राजदरबार में तरक्की धन दौलत का भंडारी होगा। सूर्य की गर्मी की आग अब जलाने की बजाय आकाश से वर्षा करेगी। उजडे मकानों को बसाने वाला, पानी भरे बादलो को बरसा लेने वाला, पत्थर (शनि) से आग, आग से पानी (मंगल नं 8 का मालिक, मंगल अब सूर्य की सहायता से मांगलिक न होगा) और पानी से मिटटी (नं 8 चलाया करता है शुक्र को जिसका घर नं 7 है) या सारा संसार पैदा करने वाला होगा। मारक स्थान के विरुद्ध मंगल बाद की जहर से जले हुए पत्थरो (शनि) से सांखियो और सांखड से हिजड़ो और नामर्दों को जवान मर्द गिना देगा। बल्कि उसके होते हुए मुर्दे भी जीवित हो जायगे। जब तक संसार के तीन कुत्तो में से एक कुत्ता ना या चोरी करने वाला न हो। 

मंगल बद और शनि के मंदे असर के बजाय अब सब उत्तम नेक फल होगा। दोस्त ग्रहो और सूर्य का फल हर और उत्तम।  जब मित्र ग्रह नं 1, साथ, साथी पर मंगल नेक हो। 

मंदी हालत 

इस घर में बैठा अकेला सूर्य  अपने शनि की चीजे (पुड्पुडी, स्त्री लिप्ता, बिच्छु, जहरीले जानवर) की सहायता से बुरा प्रभाव देगा। ख्याल रहे की कही वो ही प्यार जिस ने कोमों को खा कर छोड़ दिया तेरी तबाही का सामान न इक्कठे कर रहा हो। यदि स्वयं, बड़ा भाई या गाय की सेवा करने वाला हो तो लम्बी आयु। सफ़ेद गाय मंद भाग। दक्षिण के दरवाजा का साथ मौत की पहली निशानी होगा। संगे दुनिया (दुनिया के तीन कुत्ते)  या चोरी का प्यारा हो। बहरूपिया धन की लगन या शौक हो या मंदे प्यार में लगता हो तो ऐसा तबाह होगा की न खुद उस का निशाँ बचे और न ही नाम लेवा हो। 

जब शनि नं 3, गुरु मंदा नं 1-5 या मंगल बद हो (कयाफा शुक्र का पतंग काग रेखा होगी) तब-----उम्र छोटी और जंगल में जलता होगा जब दक्षिण के दरवाजा का साथ हो और जब बड़ा भाई न हो और टेवे वाला जब अपने बडे भाई से जुदा हो या उल्ट हो तो मंगल बद होगा। 


शुक्र नं `1-5-10 हो तो काग रेखा का मंदा फल। 

जब गुरु मंदा हो तो दुसरो को तो मौत तक से बचावे मगर अपनी किस्मत के मैदान में बहुत हल्का (मंदा) होगा।

जब बुध नं 2 में  हो तो माली हालत में मंदा होगा। 
 
    

   
            
Sun in 8th House

सूरज सूर्य खाना नंबर 8

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